छुटकू

सुबह के पौने छः बजे है, अभी मोबाइल में देखकर उठा हूँ इसिलए याद है। हाँ, सबसे पहले उठकर मैं भी मोबाइल ही चेक करता हूँ। माँ का कहना है कि मैं बहुत बड़ा बिज़नेस मेन हूँ, इसलिए बार बार फ़ोन चेक करता हूँ।

( हमारी माता जी के ताने देने की ये आदत कभी कभी बहुत पसंद आती है मुझे।)

रात भी फ़ोन चेक करते करते 3 बज गए थे, और अब न जाने ये कौन उल्लू है, जो इतने तड़के चिल्ला चिल्ला कर त्यौहार के दिन भी नींद खराब कर रहा है। अब भला आदमी दीवाली की सुबह भी जल्दी उठेगा तो किस बात का त्यौहार!

कानों को तकिए से भी दबा कर देख लिया, कुछ फायदा नहीं। आवाज अब साफ सुनाई दे रही है, और फिर लघुशंका का भी कोई समय नही होता, ऐसे हालातों में आप इसे रोक भी नहीं सकते। ख़ैर ये कला है हमारे पास , वॉशरूम से आकर भी नींद पूरी कर सकतें हैं,

उठते उठते तीन चार बक दी है, इस बावले दिये बेचने वाले को, अरे भाई भले लोगों के सोने का समय है, कोई परेशान क्यों करे।

खैर उसके सामने भी बक दूंगा उसे, डरता नहीं हूँ और बराबर का होता तो डरने वाली बात भी है, 12 साल का ये छुटकू क्या बिगाड़ लेगा मेरा, मेरी गली में आके मेरी नींद खराब करता है।

आवाज भी तो कितनी पैनी है, मानो लेडी गागा को भी टक्कर दे दे।

अब तो भई, बहुत हो गया, लघुशंका की शंका का भी समापन कर दिये, और अब तो हमारी कला भी काम नहीं आ रही, अब तो इसके दिये समेत इसे यहाँ से भगाना पड़ेगा, उठते उठते दो चार और बक दी, सुबह सुबह बकना पसंद नहीं बस सुबह की चाय और सुबह की नींद कोई ख़राब करने की हिम्मत कैसे कर सकता है।

और ये पड़ोस वाली आंटी को भी अभी दिए लेने है, कल बाजार भी तो गयी थी, वहाँ से ले आयी होती,
अभी ये हटे ठेले से, तो एक मस्त सी फटकार लगाऊ इस बावले को,

और ये ऑन्टी लोगों का बात करने का तज़ुर्बा इतना
काबिले तारीफ है कि किसी भी ऐरे ग़ैरे से बात कर लेती है, अब फटकार लगाऊ तो कैसे, अब नींद भी नहीं आएगी।

बालकॉनी में खड़े होकर बस नज़र देखो, आज तो कोई मॉर्निंग वॉक के लिए भी नहीं जा रहा, सब सुना पड़ा है, रास्ते पर इतना कचरा है पटाखों का अनुमान लगाया जा सकता है की कितने पैसे वाले अमीर लोग रहते है मेरे कॉलोनी में, और छोटी दिवाली पर इतने अमीर है, बड़ी दीवाली वाले अमीर अभी रात को सुनाई देंगे और सुबह को अख़बार में भी तस्वीरे आएंगी,

*Air quality worsens in Delhi, use of masks advised*

कोई बात नहीं ये सब तो कागजी बातें है, अब भला दिवाली पर भी पटाखे न फोड़े तो करें क्या,

शांन्ति से घर वालो के साथ दीये जलाये, मिठाई खाये,ब बैठकर घर वालों के साथ बातें कर, दोस्तों से मिले, उनके घर वालों से मिले,
नहीं भाई नहीं हमसे नहीं होगा,

और अब देखो ये अमीर आंटी अड़ चुकी है
दिये लेंगी तो 20 रुपये दर्ज़न!

छुटकू – नहीं मेडम 20 के 10 ही बेके है मैंने
अमीर आंटी – अरे कल भी बाजार में 20 के 12 मिल रहे थे, तू कोनसा इनमे मोती जड़ के लाया है,

छुटकू – ऑन्टी जी ये हमने खुद बनाये है, एक भी कच्चा दिया नहीं है, एक भी नई टूटेगा लो देखो,

(इतना कहकर उसने दो दिए आपस में ज़ोर से टकराये, एक बार को लगा कि टूट जाएंगे पर नही टूटे, सच मे पक्के दिए लाया है छुटकू।)

अमीर ऑन्टी – हा तो हमे कोनसा साल भर रखने है एक दिन ही तो जलाने है,

( छुटकू का डेमोंस्ट्रेशन का कुछ फायदा नहीं हुआ,)

इंडिया में एक को देखकर वही काम दूसरे भी करते हैं, और जहाँ एक ऑन्टी होंगी, दूसरी ऑन्टी खुद ब खुद चली आएंगी , और अब इस marketing talk में एंट्री होती है- कमल ऑन्टी की। नाम अजीब है ना, पहले मुझे भी लगता था, एक्चुअली में कमल अंकल की वाइफ का कोई नाम नहीं जानता था, तो ये गली के बच्चों ने उनका नया नाम रख दिया, ” कमल ऑन्टी“। अब बच्चे है कुछ भी बोल सकते है।

बच्चा तो ये छुटकू भी है, अकेला इतने बड़े ठेले को खींच रहा है, और दिये भी तो कम नहीं है, मिट्टी में बोझ होता है, ये सब जानते है, खैर मिट्टी से पैसा बनाने सही लोग जानते है, कुम्हार कहते है इन्हें।

छुटकू ने दोनों की आपसी बातों को टोकते हुआ कहा-

छुटकू- आंटी आप बताओ कितने दु, और 20 के 10 ही दूंगा मैं तो!
अमीर ऑन्टी – अरे लगा ले ठीक ठाक, 40 के ले लुंगी,
आप भी लेलो अंजू की मम्मी।
कमल ऑन्टी – अरे नहीं, कल ही ले आये हम लोग तो, आपको देखा इसिलए आ गई बाहर, आप लीजिये,
छुटकू : अरे ऑन्टी जी दीवाली का टाइम है, 2 दिए के लिए आप भी सुबह सुबह,
अमीर ऑन्टी – अच्छा चल दे दे , चल 20 के दे दे,
और 100 का दूंगी खुल्ले है ना तेरे पास,

*100 का खुल्ला, तो सबके पास होता है यार,
छुटकू ने जेब टटोली, हाथ आये बस 84 रुपये,
एक एक नोट को इतनी तस्सली से गिन रहा था, मुझे भी पूरा पूरा अंदाजा हो गया कि एक नोट 50 का। है, और बाकी 10 10 के 3 नोट, 2 का एक और 1 के दो सिक्के कुल मिलाकर हुए 84 रुपये,
ऑन्टी ने अपने अमीर बटुए से एक 100 का लचकता हुए नोट छुटकू को दे दिया,
छुटकू की 4 नोटों की गड्डी अब ऑन्टी जी के हांथो में आ गयी, अब बार बार गिनने की मुश्किल से भी निजात मिली अब बस एक 100 का नोट और 4 सिक्के।*

मैंने भी दोनों ऑन्टी को जाते जाते happy Diwali की टेर लगा दी, आखिर उन्हें भी तो पता चले कि हमारे घर के बच्चे कितना जल्दी उठते है और कितना सम्मान और आदर करते है, हां चाहे उनके जाने के बाद मैं दो चार और बक दु इस ठेले वाले को।

कमल ऑन्टी ने अपने ही south indian लहजे में मुस्कुराकर कहा “same to you बेटा”,

कमल ऑन्टी- अमन बेटा तुम भी ले लो दिए, इस *बदनसीब* छुटकू की भी दीवाली बन जाए, इसका कुछ बिक तो जाए,

मैंने भी उनके लहजे को सुनकर हँसी रोक कर मुस्कुराने की कोसिस की पर बिना हँसे रहा नहीं गया, सो जल्दी से मुंह फेर लिया,

नज़र पड़ी छुटकू पर, अभी इसको फटकार लगाने का मन भी नहीं कर रहा। बार बार देख रहा है एक 100 के नोट को, पर शायद उसने कमल ऑन्टी की बात सुन ली।

मेरी तरफ देखा, उसे लगा शायद मैं भी दिए ले ही लूंगा उससे, मैने गर्दन के इशारे से ही उसे इख़्तला कर दिया कि मुझे कोई दिए नही लेने उससे, पर फिर भी न जाने क्यों एक टूक देखता रहा, मानो मैंने उसे गाली दे दी हो।

अब मेरा भी दिमाग भन्ना गया, अरे एक तो मेरी नींद खराब की ऊपर से नज़र देखो इसकी,
मैंने तो कुछ कहा भी नहीं इससे, किस बात की अकड़ है इसमें।

ख़ैर छोड़ो मैंने ही नज़र हटा ली,

और उधरअमीर ऑन्टी अभी भी अपनेे महंगे झुमके कमल ऑन्टी को दिखा रही है,

छुटकू ने जाते जाते कमल ऑन्टी की तरफ देखा
और बुदबुदाया –

“मुफ़लिसी में हूँ, बदनसीब न कहिये,
एक रोज आप मेरे घर आके रहिये”

बात भी सही कही छुटकू ने, कोई गरीब है, इसका ये मतलब नही की बदनसीब भी है, 12 साल के बच्चे के मुँह से ये बात सुनकर थोड़ा अचंभित हो गया मैं।

पर शायद कोई और सुब नहीं पाया उसकी ये अनपढ़ और गरीबों वाली बात, जिसे शायद मेरी कॉलोनी का कोई भी अमीर सुन ही नहीं सकता,
और सुन भी कर कोई क्या करेगा, समझ मे भी तो आनी चाहिये।

मैंने भी सोचा क्या दिमाग लगाऊ इस लौंडे की बातों पर।
मैं भी अपने मोबाइल में लग गया।

अब नींद पूरी नहीं हो सकी तो सोशल मीडिया पर ही माथा मार लिए जाए।

Written by : Aman Gautam

INSTA acc. – @taabiirdaan

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कुछ अपने ही होंगे दुश्मन मेरे

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कुछ अपने ही होंगे दुश्मन मेरे,

देखो अब आईना दिखा रहा हूँ मैं,

 

आओ नोंच खाओ जिस्म मेरा,

देखो अब कर्ज़ा चुका रहा हूँ मैं,

 

देखने वालों अब सिक्के फैंको,

देखो एक तमाशा दिखा रहा हूँ मैं,

 

रोयेगा न एक बाशिंदा ज़नाज़े पे मेरे,

सच्चाई हस हस के बता रहा हूँ मैं,

 

*सर-ए-महशर  पे खुलेंगे राज बाकी,

कुछ बातें अभी छुपा रहा हूँ मैं,

 

आना तुम कब्र पे मिलने मुझसे,

देखो अब पता अपना बता रहा हूँ मैं।

 

Written by : Aman Gautam  {taabiirdaan}

Instagram profile

(@taabiirdaan over instagram)

[*सर-ए-महशर  – on dooms day]

A Chained Soul

A chained soul…

what you want to do..?

this is not a question anymore it’s more of a challenge, a forceful order just to imply” you can’t do anything of your own”.

and then a body seems to be free isn’t free anymore. 

A body with a chained soul

(Image source : DeviantArt)

they will ask for your option… 

what other options do a chained soul have? .. 

let me guess!! ohhhh it’s freedom… 

but there is a problem.. 

How would you explain freedom to another chained soul?

A word they haven’t heard of.

A word that could make you a rebel among them… 

beware this word could be dangerous for you… either you have enough guts to be a rebel or you could be just like them…. 

Another chained soul.!!!
it’s better to be silent and let them plant their own ideas and options in your mind … 

that’s how it works…

from one chained soul to another… 

from one body to another…

from one cage to another…

and the whole world of yours that seem to be free , it’s all chained, trapped in cage full of miseries. 

And the irony is … no one will ever find out, they make you feel it’s your decision to be chained just like their ancestors did to them. though this is not in our DNA , couse god doesn’t want that. 

Learn this trick very careful… you gonna need this… how to put a soul in chains… 

you have to acquire this… 

World is full of such teachers they will teach you.
Or you could be self learner… teach your self to fly… fly high. just like an eagle… don’t lets your soul chained, be a rebel, watch everything above the clouds… 

 By : Aman Gautam (taabiirdaan)

(Image source : MariaMazi , Deviant Art)

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A Poet is a Liar

Dear Readers,

First of all i would like to introduce myself,

My name is Aman Gautam,19, a Published Author (😂). 

Thats all for intro! Now come to the point. 

You guys must be curious about the my blog site title A poet is a liar“.  You have to be curious, cause i want that (JK). You have read a lots of poets, shayars & writers. And have you ever figure out the common thing among them.. 

Its their Imagination and the way they express their lies and all the desire they want from someone else or the beauty of nature or it could be the way they sees the world, which is absolutely never resemble the actual world.

A poet is the biggest liar you could have meet  in your entire life. 

Its sounds so ridiculous, if someone call you a liar,  even sometimes people call me a poet, although i love that feeling when someone call me a poet, a writer, a shayar. Apart from that, yeah its 110% true “a poet is a liar”.

A poet lie about everything like relationship, or nature, about you ,about himself. A lie that everyone love to hear though telling a lie is a sin. But still the most of the peoples “those who love poetry” likes poets, likes liar. 

And according to the rulebook of socialize people, if majority likes something then its not a sin anymore, eventually it became an art. 

So a poet (the liar) became an artist now. How intresting..

A poet lie about nature or you could say, a poet shows you the hidden side of everything, embrace in beautiful words, and that words form a poetry, full of lies, and there is always a reason behind a lie, hidden in  poetry, and if you are good Reader, you could sense that emotional reason behind those beautiful words. And you definitely try to relate yourself with that poetry,and it makes a poet feel good. And you start liking poet’s reason and the lies jut because they resembles yours. 

And as a writer/poet you should write what your readers want to read, but its a myth. Yes it is, I think the reader will do read everything whatever you write until your lies resembles with the readers and also lies which good enough to make a Reader go wow..

So here I am going to tell you a lot of lies that you want to hear, want to feel.

I am a poet and I am a liar.

#Aman gautam

(@vayraamgram) Aman Gautam.Do check my Instagram account. For shayri and poem lovers. 😊